Thursday, October 11, 2012

सूरज बन जाएँगे


रामेश्वर काम्बोज ‘'हिमांशु
1
बादल ये बरसेंगे ।
मन में धीर धरो
जीवन-पल हरसेंगे ।
2
तुझ-सा न मिला कोई
जिसको याद करें
अँखियाँ हर पल रोईं ।
3
अँधियारे जब आएँगे
हम तेरे पथ में
सूरज बन जाएँगे ।
4
पग-पग पर शूल बिछे ।
रुकना कब सीखा !
मंज़िल पर  फूल बिछे ।
5
जीवन भर ढोई है
पीड़ा की गठरी
फिर भी ना रोई है ।
6-
हर नारी की गाथा
आँखों में दरिया
तपता- जलता माथा ।
7
सारा प्यार लुटाया
बदले में दामन
ये पीर-भरा पाया ।
8
साध यही मन में-
तेरी पीर हरूँ
मैं हर पल जीवन में ।
9
जो मुझको दान दिया ।
तुमको पता नहीं
कितना अहसान किया ।
10
मन  को  पढ़ने वाले !
पीर न पहचाने
दिल पे लाखों ताले ।
-0-

8 comments:

Manju Mishra said...

अँधियारे जब आएँगे
हम तेरे पथ में
सूरज बन जाएँगे

bahut sundar ! aisi abhilasha ho jiski jeevan dhany hai...

kshama chahti hun bahut dinon se likhne aur padhne ke kshetra se mai anupasthit rahi hun. asha karti hun ab itni lambi anupasthiti nahin hogi.

Rachana said...

साध यही मन में-
तेरी पीर हरूँ
मैं हर पल जीवन में ।
sunder
हर नारी की गाथा
आँखों में दरिया
तपता- जलता माथा ।
jeevan kuchh aesa hi hai
अँधियारे जब आएँगे
हम तेरे पथ में
सूरज बन जाएँगे ।
samarparn ke sunder bhav

Dr.Bhawna said...

अँधियारे जब आएँगे
हम तेरे पथ में
सूरज बन जाएँगे ।

Vise to kisi ek yahana rakhna sahi mayano men sahi nahi hai,kyoki harek men itna apnatv,itani ghanta,itna sneh,itna tyaag hai ki man men gahre tak baithataa chala jaata hai,sach hai man ke andar se nikali aavaaj vaadiyon men to gunjatii hi hai...meri anekon shubkaamnaye..

Krishna Verma said...

अँधियारे जब आएँगे
हम तेरे पथ में
सूरज बन जाएँगे ।

जीवन भर ढोई है
पीड़ा की गठरी
फिर भी ना रोई है ।

मन को पढ़ने वाले !
पीर न पहचाने
दिल पे लाखों ताले।
मन को गहरे छू गए यह माहिया।
हिमांशु जी को बहुत बधाई।



ज्योत्स्ना शर्मा said...

बहुत गहरे भावों को कोमलता ,मधुरता से अभिव्यक्त करते सभी माहिया एक से बढ़कर एक हैं ...परन्तु ....
अँधियारे जब आएँगे
हम तेरे पथ में
सूरज बन जाएँगे ।

जीवन भर ढोई है
पीड़ा की गठरी
फिर भी ना रोई है ।...एवं ...

हर नारी की गाथा
आँखों में दरिया
तपता- जलता माथा ।...विशेष प्रभावी ...बहुत बधाई आपको !

sushila said...

"अँधियारे जब आएँगे
हम तेरे पथ में
सूरज बन जाएँगे ।"

मन में उजास भरता माहिया।

"जीवन भर ढोई है
पीड़ा की गठरी
फिर भी ना रोई है ।"

ऐसा सत्य जो हर नारी की गाथा है। अत्यंत मार्मिक !

"साध यही मन में-
तेरी पीर हरूँ
मैं हर पल जीवन में ।"

कितना पावन भाव और कितनी सुंदर अभिव्यक्‍ति ! बधाई ! श्रेष्‍ठ माहिया भाव और कला पक्ष दोनों का ही जवाब नहीं !

डॉ. जेन्नी शबनम said...

प्रेरणा देते शब्द...

पग-पग पर शूल बिछे ।
रुकना कब सीखा !
मंज़िल पर फूल बिछे ।

हर विधा में आपकी रचना उत्कृष्ट होती है. सभी माहिया बहुत उम्दा, बधाई.

KAHI UNKAHI said...

एक-से बढ़ कर एक तो सभी हैं, पर मुझे खास तौर से यह पंक्तियाँ तो बहुत भाई...। कितनी सच्ची बात है...।

जो मुझको दान दिया ।
तुमको पता नहीं
कितना अहसान किया ।


प्रियंका