Monday, August 6, 2012

पीड़ा मौन रही



शशि पाधा    ,नार्थ केरोलिना ( यू एस)

1
शबनम  के गहने हैं
नभ ने भेजे हैं
धरती ने पहने हैं ।
2
तुम कैसे मानोगे
पीड़ा मौन रही
तुम कैसे जानोगे  ।
3
आँगन की तुलसी है
मेघा ना  बरसे
अकुलाई, झुलसी है  ।
4
परदेसी आए  ना
विरहन की बगिया
कोयल भी गाए ना  ।
5
मोती की कुछ लड़ियाँ  ।
छलकीं नैनों से
यादों की वो घड़ियाँ  ।
6
सावन का फेरा है
सूने नैनों को
यादों ने घेरा है ।
7
वीणा के तार बजे
तुम जो आए हो
रातों को चाँद सजे  ।
-0-



2 comments:

Rajesh Kumari said...

आपकी इस उत्कृष्ट प्रस्तुति की चर्चा कल मंगलवार ७/८/१२ को राजेश कुमारी द्वारा चर्चा मंच पर की जायेगी आपका स्वागत है |

रजनी मल्होत्रा नैय्यर said...

sunder.......