Saturday, July 14, 2012

अम्बर भी मुस्काया (सेदोका)


डॉ हरदीप कौर सन्धु
1
टिमटिमाते 
तारों -भरा अम्बर 
जोड़कर खाट को 
छत पे सोएँ 
ठण्डी- ठण्डी हवाएँ 
ज्यों लोरियाँ सुनाएँ 
2
गाँव की गली 
हाँक  दे बनजारा  
रंगीन चूड़ियाँ लो !
पहने गोरी
नाज़ुक कलाई में
छन -छन छनकी
३.
मृग- नयन 
धारीदार काजल 
ज्यों आँज मटकाए
खिलता जाए 
चाँद- सा ये मुखड़ा 
ओढ़े हुए चाँदनी 
४.
ठण्डी फुहारें 
सुरमई बादल
हवा- हाथ संदेसा 
वर्षा का आया 
पुलकित ये धरा 
अम्बर भी मुस्काया  ।
-0-

सेदोका
1-डॉ ज्योत्स्ना शर्मा
1
रे कवि मन !
बस अब वीरों का
कर अभिनंदन
भाये ना मुझे
बिंदिया या कजरा
कंगन का वंदन ।
2
ले केसरिया
गूँज उठे धरती
केसरी- सा गर्जन
जागें ,जो सोए
शावक सिंहनी के
डरा विद्रोही मन ।
3
धवल कान्ति
बने मन निर्मल
सौम्य शान्त उज्ज्वल
तिरंगा मेरा
फहराये जग में
बढा़ए सुख शान्ति ।
4
हरित हरे
पीडा़एँ जगती की
तपती धरती की
सुख समृद्धि
बिखरे चहुँ ओर
होए निशि से भोर ।
5
क्षमा सहेजें
अनाचार गद्दार
कभी नहीं स्वीकार
उग्र तेज से
रहे दीपित माथा
लिखें गौरव गाथा ।
-0-
ताँका
1 - तुहिना रंजन
1
भाषाएँ कई 
संस्कृति में भिन्नता 
खान औपान 
अलग होकर भी 
हम हैं हिन्दुस्तानी  ।
-0-
2-रेनू चन्द्र
     1
भारत माता
जयकार तुम्हारी
तुम्हें ना कोई
दुश्मन छूने पा
ना कोई विपदा हो।
     2
देश में बहे
शीतल शुद्ध हवा
लहलहा
ये हरे -भरे खेत
लाएँ सुख-समृद्धि
     3    
आओ झंडे के
नीचे कसम खाएँ
भारतवासी
मिल कर जलायें
दा ज्ञान की ज्योति।

-0-

9 comments:

sushila said...

आंचलिक शब्दावली लिए बहुत सुंदर सेदोका! मनभावन बिंब सेदिका को बहुत खूबस्ररत बना रहे हैं।
डॉ हरदीप कौर सन्धु जी को बहुत-बहुत बधाई!

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत सुंदर ....

डॉ. जेन्नी शबनम said...

बहुत प्यारी रचना...
मृग- नयन
धारीदार काजल
ज्यों आँज मटकाए
खिलता जाए
चाँद- सा ये मुखड़ा
ओढ़े हुए चाँदनी

हरदीप जी को बधाई.

डॉ. जेन्नी शबनम said...

बहुत प्यारी रचना...

मृग- नयन
धारीदार काजल
ज्यों आँज मटकाए
खिलता जाए
चाँद- सा ये मुखड़ा
ओढ़े हुए चाँदनी

हरदीप जी को बधाई.

Dr.Bhawna said...

ठण्डी फुहारें
सुरमई बादल
हवा- हाथ संदेसा
वर्षा का आया
पुलकित ये धरा
अम्बर भी मुस्काया ।

Bahut bhavpurn ! bahut2 badhai..

Anonymous said...

हरदीप जी को बधाई. ठण्डी फुहारें

सुरमई बादल

हवा- हाथ संदेसा

वर्षा का आया

पुलकित ये धरा

अम्बर भी मुस्काया ............ बहुत सुंदर सेदिका !
Dr Saraswati Mathur

Rachana said...

टिमटिमाते
तारों -भरा अम्बर
जोड़कर खाट को
छत पे सोएँ
ठण्डी- ठण्डी हवाएँ
ज्यों लोरियाँ सुनाएँ
kya khoob thandi hava ka lori sunana aanand aaya
badhai
rachana

KAHI UNKAHI said...

बहुत खूबस्ररत रचना...हरदीप जी को बहुत-बहुत बधाई...|

sunita agarwal said...

sundar rachnaye .. :)