Tuesday, May 1, 2012

हाइगा





19 comments:

hridyanubhuti said...

खुबसूरत रंगबिरंगी प्रस्तुति,आशा से भरी हुई.

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत सुंदर हाईगा

sushila said...

इस मनमोहक प्रस्तुति (हाइगा और चित्र) के लिए डॉ सरस्वती माथुर और डॉ हरदीप कौर संधु को बधाई !

मेरा साहित्य said...

बहुत सुंदर लिखा है और चित्रों ने तो कमाल ही कर दिया है आप दोनों का आभार
रचना

ऋता शेखर मधु said...

लाजवाब...आप दोनों को बधाई!

Anonymous said...

बहुत खूबसूरत।
कृष्णा वर्मा

KAHI UNKAHI said...

बहुत सुंदर...बधाई!

KAHI UNKAHI said...

बहुत सुंदर...बधाई!

डॉ0सरस्वती माथुर said...

आप सभी का हाइगा पसंद करने के लिए शुक्रिया ... मेरी पसंद के इन चित्रों पर लिखे मेरे हाइकु को एक नए स्वरुप में डाल कर प्रस्तुत करने के लिए हरदीप जी का बहुत- बहुत आभार !
डॉ0सरस्वती माथुर

Dr.Anita Kapoor said...

बहुत सुंदर हाईगा....

renuchandra said...

बहुत सुन्दर हाईगा और चित्र हैं।बधाई.. रेनु चन्द्रा

ज्योत्स्ना शर्मा said...

मन और नयन दोनों को आनन्दित करते बहुत सुन्दर हाइगा.....बहुत बधाई...!

amita kaundal said...

सुंदर रंग बिरंगे हईगा बधाई........
अमिता कौंडल

Rama said...

खूबसूरत -भावपूर्ण हाइगा के लिए सरस्वती जी एवं हरदीप जी को बधाई ...
डा. रमा द्विवेदी

Maheshwari kaneri said...

भावपूर्ण खूबसूरत हाइगा के लिए बधाई........

Dr.Bhawna said...

Khubsurat prastuti bahut-2 badhai...

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
--
आज चार दिनों बाद नेट पर आना हुआ है। अतः केवल उपस्थिति ही दर्ज करा रहा हूँ!

डॉ. जेन्नी शबनम said...

बहुत सुन्दर...

shobha rastogi shobha said...

श्वेत सुबह तरू के हरे पत्तों से मिलके हरी हो गयी है |--- लाली मेरे लाल की जित देखो तित लाल ,लाली देखन मै गयी मै भी हो गयी लाल |-- कबीर | प्रेम का उदात्त रूप, एकात्मकता का सुन्दर सजीला चित्रण जिसे चित्र व शब्दों का परिधान मै बेहद खुबसूरत आकर दिया है,--सरस्वती जी व डा ० संधू जी ने | ..बधाई..|दोनों प्रस्तुति शब्द व चित्र की लय पर बेजोड़ हैं |