Thursday, January 5, 2012

दर्दीला इंद्रधनुष


डॉ0 अनीता कपूर
1
बरसी घटा
पानी-पानी हुई मैं
बरसी घटा
उम्र के नभ खिला
दर्दीला इंद्रधनुष
2
मैं उतरन
बनना नहीं चाहूँ
तू तो हवा -सा
तू बदलता रिश्ते
कपड़ों की तरह
3
ताजमहल
है रिश्ता यूँ जोड़ता
चूमता माथा
भटकती कहानी
लरजते होंठों से
4
टूटी लकीरें
उल्टी- सी इबारतें
जख्मों की बातें
माथें पड़ी लकीरें
इतिहास दफ़न
5
नदी में चाँद
तैरता ही रहता
पी लिया घूँट
नदी का वही चाँद
उतरा हथेली पे 
6
कोख का क़र्ज़ 
कोख का बही खाता
रिश्ते मुनीम
 
फिर तो हेरा-फेरी
कराहती ज़िन्दगी
7
अरी ज़िन्दगी
किसके लिए काते
मोह का धागा
कच्ची डोर के  रिश्ते
बचाऊँ भी मैं कैसे
8
 यह सड़क
है दिल धड़काती
बन सर्पीली
ले आती उसे घर
ले के हाथ में हाथ
9
बरसों बाद
हुई है मुलाकात
काँपें हैं मन
हँसी, अधूरी नज़्म-
‘मुझे पूरा तो करो’
 10
 टुकड़ा धूप
थामकर उँगली
सूरज की वो
सीढियां अँधेरे की
फिर उतर गया

11.
बिखरें रंग
फूलों से झरे हुए
धूप फागुनी
सजे धरा -गगन
जग- मनभावन
12
रेशमी धूप
सपनो के आँगन
हुआ उजाला
साँसों की सरगम
छेड़े सुर सितार
-0-


2 comments:

Dr.Bhawna said...

टुकड़ा धूप
थामकर उँगली
सूरज की वो
सीढियां अँधेरे की
फिर उतर गया...
Bahut khub !

Anonymous said...

सभी तांका सुन्दर भावों से सजे मन को छू गए....बधाई।