Thursday, November 10, 2011

घट-घट बसता


त्रिवेणी परिवार की ओर से सभी को प्रकाशपर्व की अनन्त  शुभकामनाएँ !
हरदीप कौर सन्धु -रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु
1
चाहे हो थोड़ी
मेहनत की रोटी
स्वाद अनोखा
शुभ कर्म है सच्चा
बाकी सौदा है कच्चा
2
खुशियाँ भरे
प्रभु मेहर करे
सब हर्षाएँ
प्रभु का सुमिरन
मन करे पावन ।
3
काबा या काशी
घट-घट बसता
वो अविनाशी
पखेरु या मानुष
सन्तान है उसकी ।
4
तृष्णा का खूँटा
लालच की जेवड़ी
सबको बाँधे
हरि का प्यारा सदा
निर्द्वन्द्व  जग घूमे ।
5
कण-कण में
प्रभु सदा समाया
बिना ज्ञान के
नज़र नहीं आया
निर्मल मन पाया
-0-

1 comment:

KAHI UNKAHI said...

सुन्दर तांके...।